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ramayan 4.52.1: तत्पश्चात जब सब वानर योद्धा खा-पीकर विश्राम कर चुके, तब धर्ममार्ग पर चलने वाली वह एकनिष्ठा तपस्विनी स्त्री उनसे इस प्रकार बोली -॥1॥   |   ramayan सर्ग 4.52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.52.1 
अथ तानब्रवीत् सर्वान् विश्रान्तान् हरियूथपान्।
इदं वचनमेकाग्रा तापसी धर्मचारिणी॥ १॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात जब सब वानर योद्धा खा-पीकर विश्राम कर चुके, तब धर्ममार्ग पर चलने वाली वह एकनिष्ठा तपस्विनी स्त्री उनसे इस प्रकार बोली -॥1॥
 
Thereafter, when all the monkey warriors had eaten and drunk and had rested, that single-hearted ascetic lady, who followed the path of Dharma, spoke to them as follows -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)