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ramayan 4.50.3: घूमते-घूमते वे तीनों वानर पर्वत के दक्षिण-पश्चिम कोने में पहुँच गए। वहाँ रहते हुए सुग्रीव द्वारा निर्धारित समय बीत गया।   |   ramayan सर्ग 4.50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.50.3 
आसेदुस्तस्य शैलस्य कोटिं दक्षिणपश्चिमाम्।
तेषां तत्रैव वसतां स कालो व्यत्यवर्तत॥ ३॥
 
 
अनुवाद
घूमते-घूमते वे तीनों वानर पर्वत के दक्षिण-पश्चिम कोने में पहुँच गए। वहाँ रहते हुए सुग्रीव द्वारा निर्धारित समय बीत गया।
 
While roaming around, those three monkeys reached the south-west corner of the mountain. While staying there, the time fixed by Sugreeva passed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)