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ramayan 4.50.28-30h: वहाँ नीले लाजवर्द के समान आभा वाली कमल लताएँ दिखाई दे रही थीं, जो पक्षियों से आच्छादित थीं। कई झीलें भी दिखाई दे रही थीं, जो युवा सूर्य के समान आभा वाले विशाल सुनहरे वृक्षों से घिरी हुई थीं। उनके भीतर सुनहरे रंग की बड़ी-बड़ी मछलियाँ शोभायमान लग रही थीं। वे झीलें सुनहरे कमलों से सुशोभित थीं और स्वच्छ जल से भरी हुई थीं।   |   ramayan सर्ग 4.50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना  »  श्लोक 28-30h
 
 
श्लोक  4.50.28-30h 
नीलवैदूर्यवर्णाश्च पद्मिनी: पतगैर्वृता:॥ २८॥
महद्भि: काञ्चनैर्वृक्षैर्वृता बालार्कसंनिभै:।
जातरूपमयैर्मत्स्यैर्महद्भिश्चाथ पङ्कजै:॥ २९॥
नलिनीस्तत्र ददृशु: प्रसन्नसलिलायुता:।
 
 
अनुवाद
वहाँ नीले लाजवर्द के समान आभा वाली कमल लताएँ दिखाई दे रही थीं, जो पक्षियों से आच्छादित थीं। कई झीलें भी दिखाई दे रही थीं, जो युवा सूर्य के समान आभा वाले विशाल सुनहरे वृक्षों से घिरी हुई थीं। उनके भीतर सुनहरे रंग की बड़ी-बड़ी मछलियाँ शोभायमान लग रही थीं। वे झीलें सुनहरे कमलों से सुशोभित थीं और स्वच्छ जल से भरी हुई थीं।
 
There, lotus creepers with a lustre like blue lapis lazuli were visible, which were covered with birds. Many such lakes were also seen, which were surrounded by huge golden trees with a radiance like that of the young sun. Large fishes of golden colour looked beautiful inside them. Those lakes were decorated with golden lotuses and were filled with clean water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)