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ramayan 4.50.27-28h: वे प्रातःकालीन सूर्य के समान प्रतीत हो रहे थे। उनके नीचे वैदूर्यमानिकी वेदी बनी हुई थी। वे स्वर्ण वृक्ष अपने दीप्तिमान रूप से चमक रहे थे।   |   ramayan सर्ग 4.50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  4.50.27-28h 
तरुणादित्यसंकाशान् वैदूर्यमयवेदिकान्॥ २७॥
बिभ्राजमानान् वपुषा पादपांश्च हिरण्मयान्।
 
 
अनुवाद
वे प्रातःकालीन सूर्य के समान प्रतीत हो रहे थे। उनके नीचे वैदूर्यमानिकी वेदी बनी हुई थी। वे स्वर्ण वृक्ष अपने दीप्तिमान रूप से चमक रहे थे।
 
They looked like the morning sun. Vaiduryamaniki altar was built below them. Those golden trees were shining with their radiant form.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)