vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
»
सर्ग 50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना
»
श्लोक 26-27h
श्लोक
4.50.26-27h
स्तबकै: काञ्चनैश्चित्रै रक्तै: किसलयैस्तथा॥ २६॥
आपीडैश्च लताभिश्च हेमाभरणभूषितान्।
अनुवाद
उन वृक्षों पर विचित्र सुनहरे गुच्छे और लाल पत्ते मुकुट जैसे थे। उन पर लताएँ लिपटी हुई थीं और वे स्वर्ण आभूषणों से सजे हुए थे।
Strange golden bunches and red leaves were like crowns of those trees. Creepers were wrapped around them and they were adorned with golden ornaments.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×