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ramayan 4.50.23-24h: जब वे वीर वानर दुर्बल, उदास, थके हुए और जीवन से निराश हो गए, तब उन्हें वहाँ प्रकाश दिखाई दिया।   |   ramayan सर्ग 4.50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  4.50.23-24h 
ते कृशा दीनवदना: परिश्रान्ता: प्लवङ्गमा:॥ २३॥
आलोकं ददृशुर्वीरा निराशा जीविते यदा।
 
 
अनुवाद
जब वे वीर वानर दुर्बल, उदास, थके हुए और जीवन से निराश हो गए, तब उन्हें वहाँ प्रकाश दिखाई दिया।
 
When those brave monkeys became weak, sad and tired and despaired of life, then they saw the light there. 23 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)