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ramayan 4.50.21-22h: वे एक दूसरे को पकड़े हुए एक योजन तक उस भयंकर गुफा में चले गये, जो नाना प्रकार के वृक्षों से भरी हुई थी।   |   ramayan सर्ग 4.50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  4.50.21-22h 
ततस्तस्मिन् बिले भीमे नानापादपसंकुले॥ २१॥
अन्योन्यं सम्परिष्वज्य जग्मुर्योजनमन्तरम्।
 
 
अनुवाद
वे एक दूसरे को पकड़े हुए एक योजन तक उस भयंकर गुफा में चले गये, जो नाना प्रकार के वृक्षों से भरी हुई थी।
 
They went holding each other for a distance of one yojana into that dreadful cave filled with various kinds of trees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)