Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.50.19-20h: उनकी दृष्टि कभी कहीं अटकती नहीं थी। उनका तेज और पराक्रम कभी बाधित नहीं होता था। उनका वेग वायु के समान था। अंधकार में भी उनकी दृष्टि कार्य करती रहती थी॥19 1/2॥ | ramayan सर्ग 4.50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न तेषां सज्जते दृष्टिर्न तेजो न पराक्रम:॥ १९॥
वायोरिव गतिस्तेषां दृष्टिस्तमसि वर्तते।
अनुवाद
उनकी दृष्टि कभी कहीं अटकती नहीं थी। उनका तेज और पराक्रम कभी बाधित नहीं होता था। उनका वेग वायु के समान था। अंधकार में भी उनकी दृष्टि कार्य करती रहती थी॥19 1/2॥
His vision never got stuck anywhere. His brilliance and valour never got obstructed. His speed was like the wind. His vision was working even in darkness.॥ 19 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥