Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.50.14-15h: ‘मित्रो! दक्षिण दिशा के देश प्रायः पर्वत-श्रेणियों से घिरे हुए हैं। उनमें मिथिला की पुत्री सीता को खोजते-खोजते हम सब लोग बहुत थक गए; परन्तु वे हमें कहीं दिखाई नहीं दीं।॥14 1/2॥ | ramayan सर्ग 4.50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गिरिजालावृतान् देशान् मार्गित्वा दक्षिणां दिशम्॥ १४॥
वयं सर्वे परिश्रान्ता न च पश्याम मैथिलीम्।
अनुवाद
‘मित्रो! दक्षिण दिशा के देश प्रायः पर्वत-श्रेणियों से घिरे हुए हैं। उनमें मिथिला की पुत्री सीता को खोजते-खोजते हम सब लोग बहुत थक गए; परन्तु वे हमें कहीं दिखाई नहीं दीं।॥14 1/2॥
‘Friends! The countries in the southern direction are mostly surrounded by mountain ranges. We all got very tired while searching for Mithila's daughter Sita in them; but we did not see her anywhere.॥ 14 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥