श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री तथा श्रीराम द्वारा वालि वध की प्रतिज्ञा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.5.8 
श्रुत्वा हनूमतो वाक्यं सुग्रीवो वानराधिप:।
दर्शनीयतमो भूत्वा प्रीत्योवाच च राघवम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हनुमान् के ये वचन सुनकर वानरराज सुग्रीव स्वेच्छापूर्वक अत्यंत विकराल रूप धारण करके श्री रघुनाथजी के पास आए और बड़े प्रेम से बोले-॥8॥
 
On hearing these words of Hanuman, the monkey king Sugreeva voluntarily assumed a very spectacular form and came to Sri Raghunath and spoke with great love -॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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