श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री तथा श्रीराम द्वारा वालि वध की प्रतिज्ञा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  4.5.6 
तस्यास्य वसतोऽरण्ये नियतस्य महात्मन:।
रावणेन हृता भार्या स त्वां शरणमागत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
महात्मा श्री राम दण्डकारण्य में ऋषियों के समान नियमों का पालन करते हुए रहते थे। एक दिन रावण आया और उनकी पत्नी सीता का अपहरण कर उन्हें निर्जन आश्रम से ले गया। वह उनकी खोज में आपकी सहायता लेने आपके पास आया है।॥6॥
 
‘Mahatma Shri Ram lived in Dandakaranya, following the rules like sages. One day Ravana came and kidnapped his wife Sita from the deserted ashram. He has come to you to seek your help in searching for her.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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