श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री तथा श्रीराम द्वारा वालि वध की प्रतिज्ञा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.5.3 
इक्ष्वाकूणां कुले जातो रामो दशरथात्मज:।
धर्मे निगदितश्चैव पितुर्निर्देशकारक:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
ये श्री राम इक्ष्वाकु कुल में उत्पन्न हुए हैं। ये राजा दशरथ के पुत्र हैं और स्वधर्मपालन के लिए संसार में विख्यात हैं। ये अपने पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए इस वन में आए हैं॥ 3॥
 
This Shri Ram was born in the Ikshwaku clan. He is the son of King Dasharath and is famous in the world for following his own religion. He has come to this forest to obey his father's orders.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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