श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री तथा श्रीराम द्वारा वालि वध की प्रतिज्ञा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.5.29 
स तु तद् वचनं श्रुत्वा राघवस्यात्मनो हितम्।
सुग्रीव: परमप्रीत: परमं वाक्यमब्रवीत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी के अत्यंत हितकारी वचन सुनकर सुग्रीव अत्यंत प्रसन्न हुए और मधुर वाणी में बोले-॥29॥
 
Sugreeva was very pleased to hear the words of Shri Raghunathji which were extremely beneficial for him. He spoke in a pleasant voice -॥ 29॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd