श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री तथा श्रीराम द्वारा वालि वध की प्रतिज्ञा  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  4.5.28-29h 
तमद्य वालिनं पश्य तीक्ष्णैराशीविषोपमै:॥ २८॥
शरैर्विनिहतं भूमौ प्रकीर्णमिव पर्वतम्।
 
 
अनुवाद
'आज देखो, मैं अपने विषैले सर्पों के समान तीक्ष्ण बाणों से बाली को मारकर पृथ्वी पर गिरा दूँगा। वह इन्द्र के वज्र से खंडित होकर गिरे हुए पर्वत के समान दिखाई देगा।'
 
‘Today, see, I will kill Vali with my arrows as sharp as poisonous snakes and make her fall on the earth. She will look like a mountain shattered and fallen by Indra's thunderbolt.'
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd