श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री तथा श्रीराम द्वारा वालि वध की प्रतिज्ञा  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  4.5.24-25h 
एवमुक्तस्तु तेजस्वी धर्मज्ञो धर्मवत्सल:॥ २४॥
प्रत्यभाषत काकुत्स्थ: सुग्रीवं प्रहसन्निव।
 
 
अनुवाद
सुग्रीव के ऐसा कहने पर धर्म के ज्ञाता, धर्म के भक्त, ककुत्स्थ कुल के स्वामी ज्ञानी श्री राम ने वहाँ हँसकर सुग्रीव से इस प्रकार कहा-॥24॥
 
On Sugriva saying this, the knowledgeable Shri Ram, the expert of religion, the devotee of Dharma, the owner of Kakutstha clan, and laughingly replied to Sugriva there in this manner – ॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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