श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री तथा श्रीराम द्वारा वालि वध की प्रतिज्ञा  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  4.5.23-24h 
वालिनो मे महाभाग भयार्तस्याभयं कुरु॥ २३॥
कर्तुमर्हसि काकुत्स्थ भयं मे न भवेद् यथा।
 
 
अनुवाद
महाभाग! मुझ अपने सेवक को, जो बालि के भय से पीड़ित है, सुरक्षा प्रदान कीजिए। हे ककुत्स्थ! आप ऐसा कार्य कीजिए, जिससे मुझे कोई भय न रहे।॥23 1/2॥
 
‘Mahabhaag! Please grant protection to me, your servant, who is suffering from the fear of Vali. O Kakutstha! You should do such a thing, that there is no fear left for me.'॥ 23 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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