श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री तथा श्रीराम द्वारा वालि वध की प्रतिज्ञा  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  4.5.22-23h 
सोऽहं त्रस्तो वने भीतो वसाम्युद्‍भ्रान्तचेतन:॥ २२॥
वालिना निकृतो भ्रात्रा कृतवैरश्च राघव।
 
 
अनुवाद
‘रघुनन्दन! मेरे बड़े भाई वालि ने मुझे घर से निकाल दिया है और मुझसे द्वेष रखने लगा है। उससे व्याकुल और भयभीत होकर मैं इस वन में रहता हूँ॥ 22॥
 
‘Raghunandan! My elder brother Vali has thrown me out of the house and has become hostile towards me. Being troubled and scared by her, I live in this forest.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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