श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री तथा श्रीराम द्वारा वालि वध की प्रतिज्ञा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.5.2 
अयं रामो महाप्राज्ञ सम्प्राप्तो दृढविक्रम:।
लक्ष्मणेन सह भ्रात्रा रामोऽयं सत्यविक्रम:॥ २॥
 
 
अनुवाद
महाप्रज्ञ! जिनका पराक्रम अत्यन्त प्रबल और अक्षय है, वे श्री रामचन्द्रजी अपने भाई लक्ष्मण के साथ आये हैं॥2॥
 
‘Mahapragya! Shri Ramchandraji, whose bravery is very strong and unfailing, has come with his brother Lakshman. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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