श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री तथा श्रीराम द्वारा वालि वध की प्रतिज्ञा  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  4.5.17-18h 
त्वं वयस्योऽसि हृद्यो मे ह्येकं दु:खं सुखं च नौ॥ १७॥
सुग्रीवो राघवं वाक्यमित्युवाच प्रहृष्टवत्।
 
 
अनुवाद
उस समय सुग्रीव ने प्रसन्नतापूर्वक श्री रामचन्द्रजी से कहा - 'आप मेरे प्रिय मित्र हैं। आज से हमारे दुःख-सुख एक समान हैं।'॥17 1/2॥
 
At that time Sugreeva said to Shri Ramchandraji happily - 'You are my dear friend. From today onwards our sorrows and happiness are the same.'॥ 17 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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