श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री तथा श्रीराम द्वारा वालि वध की प्रतिज्ञा  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  4.5.12-13h 
एतत् तु वचनं श्रुत्वा सुग्रीवस्य सुभाषितम्।
सम्प्रहृष्टमना हस्तं पीडयामास पाणिना॥ १२॥
हृष्ट: सौहृदमालम्ब्य पर्यष्वजत पीडितम्।
 
 
अनुवाद
सुग्रीव के ये सुंदर वचन सुनकर भगवान श्री राम का मन प्रसन्न हो गया। उन्होंने उसका हाथ पकड़कर दबाया और सौहार्द का आश्रय लेकर बड़े हर्ष के साथ शोकग्रस्त सुग्रीव को गले लगा लिया। ॥12 1/2॥
 
Hearing these beautiful words of Sugreeva, Lord Shri Ram's mind became happy. He held his hand and pressed it and taking refuge in cordiality, embraced the grief-stricken Sugreeva with great joy. ॥ 12 1/2 ॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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