श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री तथा श्रीराम द्वारा वालि वध की प्रतिज्ञा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.5.1 
ऋष्यमूकात् तु हनुमान् गत्वा तं मलयं गिरिम्।
आचचक्षे तदा वीरौ कपिराजाय राघवौ॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री राम और लक्ष्मण को ऋष्यमूक पर्वत पर सुग्रीव के निवासस्थान में बिठाकर हनुमान जी वहाँ से मलय पर्वत (जो ऋष्यमूक का एक शिखर है) पर गए और वहाँ वानरराज सुग्रीव को उन दोनों रघुवंशी वीरों का परिचय देते हुए इस प्रकार बोले-॥1॥
 
After making Shri Ram and Lakshman sit in the abode of Sugriva on Rishyamook mountain, Hanuman ji went from there to Malay mountain (which is a peak of Rishyamook) and there, while introducing the two Raghuvanshi heroes to the monkey king Sugriva, he said thus - ॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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