श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 49: अङ्गद और गन्धमादन के आश्वासन देने पर वानरों का पुनः उत्साह पूर्वक अन्वेषण-कार्य में प्रवृत्त होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.49.7 
अद्यापीदं वनं दुर्गं विचिन्वन्तु वनौकस:।
खेदं त्यक्त्वा पुन: सर्वं वनमेव विचिन्वताम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘आज भी सब वानरों को अपना दुःख छोड़कर इस दुर्गम वन में अपनी खोज आरम्भ करनी चाहिए और सम्पूर्ण वन को छान मारना चाहिए।॥7॥
 
‘Today too all the monkeys should leave their sorrows behind and begin their search in this inaccessible forest and should rummage through the entire forest.॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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