श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 49: अङ्गद और गन्धमादन के आश्वासन देने पर वानरों का पुनः उत्साह पूर्वक अन्वेषण-कार्य में प्रवृत्त होना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.49.16 
ते शारदाभ्रप्रतिमं श्रीमद्रजतपर्वतम्।
शृङ्गवन्तं दरीवन्तमधिरुह्य च वानरा:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उनके सामने शरद ऋतु के मेघों के समान शोभायमान, अनेक शिखरों और गुफाओं से युक्त, एक चाँदी का पर्वत प्रकट हुआ। सब वानर उस पर चढ़कर खोज करने लगे॥16॥
 
A silver mountain appeared in front of them, looking as beautiful as the autumn clouds, with many peaks and caves. All the monkeys climbed it and started searching.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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