श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 49: अङ्गद और गन्धमादन के आश्वासन देने पर वानरों का पुनः उत्साह पूर्वक अन्वेषण-कार्य में प्रवृत्त होना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.49.13 
पुनर्मार्गामहे शैलान् कन्दरांश्च शिलांस्तथा।
काननानि च शून्यानि गिरिप्रस्रवणानि च॥ १३॥
 
 
अनुवाद
आओ, हम पुनः पर्वतों, गुफाओं, चट्टानों, निर्जन वनों और पर्वतीय झरनों की खोज करें॥13॥
 
‘Let us once again search for the mountains, caves, rocks, deserted forests and mountain springs.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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