vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
»
सर्ग 49: अङ्गद और गन्धमादन के आश्वासन देने पर वानरों का पुनः उत्साह पूर्वक अन्वेषण-कार्य में प्रवृत्त होना
»
श्लोक 13
श्लोक
4.49.13
पुनर्मार्गामहे शैलान् कन्दरांश्च शिलांस्तथा।
काननानि च शून्यानि गिरिप्रस्रवणानि च॥ १३॥
अनुवाद
आओ, हम पुनः पर्वतों, गुफाओं, चट्टानों, निर्जन वनों और पर्वतीय झरनों की खोज करें॥13॥
‘Let us once again search for the mountains, caves, rocks, deserted forests and mountain springs.॥ 13॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd