श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 49: अङ्गद और गन्धमादन के आश्वासन देने पर वानरों का पुनः उत्साह पूर्वक अन्वेषण-कार्य में प्रवृत्त होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.49.12 
सदृशं खलु वो वाक्यमङ्गदो यदुवाच ह।
हितं चैवानुकूलं च क्रियतामस्य भाषितम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वानरों! राजकुमार अंगद ने जो कहा है, वह तुम सबके लिए उपयुक्त, हितकर और हितकर है; अतः सब लोग उनके वचनों के अनुसार ही आचरण करें॥ 12॥
 
‘Monkeys! What Prince Angada has said is suitable, beneficial and favourable for you all; therefore everyone should act according to his words.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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