श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 49: अङ्गद और गन्धमादन के आश्वासन देने पर वानरों का पुनः उत्साह पूर्वक अन्वेषण-कार्य में प्रवृत्त होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.49.11 
अङ्गदस्य वच: श्रुत्वा वचनं गन्धमादन:।
उवाच व्यक्तया वाचा पिपासाश्रमखिन्नया॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अंगद की यह बात सुनकर गन्धमादन ने प्यास और थकान से क्षीण हुई स्पष्ट वाणी में कहा- 11॥
 
Hearing this from Angad, Gandhamadana said in a clear voice weakened by thirst and fatigue: 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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