श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 48: दक्षिण दिशा में गये हुए वानरों का सीता की खोज आरम्भ करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.48.7 
तादृशान्यप्यरण्यानि विचित्य भृशपीडिता:।
स देशश्च दुरन्वेष्यो गुहागहनवान् महान्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उन वनों में भी खोज करते समय उन वानरों को बहुत कष्ट सहने पड़े। वह विशाल प्रदेश अनेक गुफाओं और घने वनों से आच्छादित था। इसलिए वहाँ खोज का कार्य अत्यन्त कठिन प्रतीत हो रहा था॥ 7॥
 
Even in those forests, those monkeys had to endure a lot of hardships while searching. That vast region was covered with many caves and dense forests. Therefore, the task of searching there seemed very difficult.॥ 7॥
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