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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
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सर्ग 48: दक्षिण दिशा में गये हुए वानरों का सीता की खोज आरम्भ करना
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श्लोक 10
श्लोक
4.48.10
न सन्ति महिषा यत्र न मृगा न च हस्तिन:।
शार्दूला: पक्षिणो वापि ये चान्ये वनगोचरा:॥ १०॥
अनुवाद
उस प्रदेश में न तो भैंसे थे, न हिरण, न हाथी, न व्याघ्र, न पक्षी और न ही कोई अन्य वन-पशु था ॥10॥
In that region there were no buffaloes, no deer, no elephants, no tigers, no birds and there was no other forest animal either. ॥10॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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