श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 48: दक्षिण दिशा में गये हुए वानरों का सीता की खोज आरम्भ करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.48.1 
सह ताराङ्गदाभ्यां तु सहसा हनुमान् कपि:।
सुग्रीवेण यथोद्दिष्टं गन्तुं देशं प्रचक्रमे॥ १॥
 
 
अनुवाद
दूसरी ओर हनुमान, तार और अंगद के साथ अचानक सुग्रीव के कहे अनुसार दक्षिण देश की ओर चल पड़े।
 
On the other hand Hanuman along with Taar and Angad suddenly headed towards the southern countries as told by Sugreev.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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