श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 47: पूर्व आदि तीन दिशाओं में गये हुए वानरों का निराश होकर लौट आना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.47.3 
सुग्रीवेण समाख्याता: सर्वे वानरयूथपा:।
तत्र देशान् विचिन्वन्ति सशैलवनकाननान्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव की आज्ञा से सभी वानर सेनापति अपने-अपने दिशा के पर्वतों, वनों और जंगलों सहित सम्पूर्ण देश का अन्वेषण करने लगे।
 
All the monkey chiefs whom Sugreeva had commanded, began to explore the entire country, including the mountains, forests and jungles of their respective directions.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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