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श्लोक 4.47.10  |
तं प्रस्रवणपृष्ठस्थं समासाद्याभिवाद्य च।
आसीनं सह रामेण सुग्रीवमिदमब्रुवन्॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| सब वानर प्रस्रवणगिरि पर श्री रामजी के साथ बैठे हुए सुग्रीव के पास आए और उन्हें प्रणाम करके इस प्रकार बोले -॥10॥ |
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| All the monkeys came to Sugreeva who was sitting with Sri Rama on Prasravangiri and bowed to him and said thus -॥10॥ |
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