श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 47: पूर्व आदि तीन दिशाओं में गये हुए वानरों का निराश होकर लौट आना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.47.1 
दर्शनार्थं तु वैदेह्या: सर्वत: कपिकुञ्जरा:।
व्यादिष्टा: कपिराजेन यथोक्तं जग्मुरञ्जसा॥ १॥
 
 
अनुवाद
वानरराज द्वारा सब दिशाओं में जाने की आज्ञा पाकर, सब श्रेष्ठ वानर उत्साहपूर्वक विदेह राजकुमारी सीता की खोज में उन दिशाओं में चल पड़े, जहाँ जाने का आदेश उन्हें दिया गया था॥1॥
 
Having been ordered by the King of the Monkeys to proceed in all directions, all the best monkeys enthusiastically set out in the directions they had been ordered to go in search of Videha princess Sita.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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