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श्लोक 4.46.17  |
दिशस्तस्यास्ततो भूय: प्रस्थितो दक्षिणां दिशम्।
विन्ध्यपादपसंकीर्णां चन्दनद्रुमशोभिताम्॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| उस दिशा को छोड़कर मैं पुनः दक्षिण दिशा की ओर चला, जो विन्ध्य पर्वतों और नाना प्रकार के वृक्षों से युक्त है तथा चन्दन के वृक्षों से सुशोभित है॥17॥ |
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| Leaving that direction I again headed towards the south, which is full of the Vindhya mountains and various kinds of trees and is adorned by sandalwood trees.॥ 17॥ |
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