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श्लोक 4.46.14  |
पूर्वां दिशं ततो गत्वा पश्यामि विविधान् द्रुमान्।
पर्वतान् सदरीन् रम्यान् सरांसि विविधानि च॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् पूर्व दिशा में जाकर मैंने नाना प्रकार के वृक्ष, गुफाओं से युक्त सुन्दर पर्वत और नाना प्रकार के सरोवर देखे॥14॥ |
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| ‘Thereafter going towards the east I saw various kinds of trees, beautiful mountains with caves and various kinds of lakes.॥ 14॥ |
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