श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 44: श्रीराम का हनुमान जी को अँगूठी देकर भेजना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.44.3 
न भूमौ नान्तरिक्षे वा नाम्बरे नामरालये।
नाप्सु वा गतिसङ्गं ते पश्यामि हरिपुंगव॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे वानरश्रेष्ठ! मैं पृथ्वी, अन्तरिक्ष, आकाश, स्वर्ग और जल में भी तुम्हारी गति में कोई बाधा नहीं देखता।॥3॥
 
‘O best of the apes! I do not see any obstruction in your movement on earth, in the space, in the sky, in the heavens or even in the water.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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