श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 44: श्रीराम का हनुमान जी को अँगूठी देकर भेजना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.44.10 
तदेवं प्रस्थितस्यास्य परिज्ञातस्य कर्मभि:।
भर्त्रा परिगृहीतस्य ध्रुव: कार्यफलोदय:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'ऐसे कार्यों से परखे गए और श्रेष्ठ माने गए हनुमान्‌जी को उनके स्वामी सुग्रीव सीता की खोज के लिए भेज रहे हैं। यह निश्चित है कि वे उनके द्वारा इस कार्य (सीता-दर्शन) का फल अवश्य प्राप्त करेंगे।'॥10॥
 
‘Hanuman, who has been tested through such tasks and has been considered the best, is being sent by his master Sugreeva to search for Sita. It is certain that he will achieve the fruit of this task (sight of Sita) through him.'॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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