श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 44: श्रीराम का हनुमान जी को अँगूठी देकर भेजना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.44.1 
विशेषेण तु सुग्रीवो हनूमत्यर्थमुक्तवान्।
स हि तस्मिन् हरिश्रेष्ठे निश्चितार्थोऽर्थसाधने॥ १॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव ने सीताजी के अन्वेषण का प्रयोजन विशेष रूप से हनुमानजी के समक्ष प्रस्तुत किया; क्योंकि उन्हें दृढ़ विश्वास था कि वानरश्रेष्ठ हनुमानजी ही इस कार्य को पूर्ण कर सकेंगे॥1॥
 
Sugriva especially presented the purpose of investigation of Sita before Hanumanji; Because he had the strong belief that Hanumanji, the best monkey, would be able to accomplish this task. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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