श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  4.43.38 
ते नयन्ति परं तीरं सिद्धान् प्रत्यानयन्ति च।
उत्तरा: कुरवस्तत्र कृतपुण्यप्रतिश्रया:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वे बाँस (साधन बनकर) सिद्ध पुरुषों को शैलोदा के उस पार ले जाते हैं और वहाँ से इस पार ले आते हैं। जहाँ केवल पुण्यात्मा पुरुष रहते हैं, वह शैलोदा के तट पर स्थित उत्तर कुरुराष्ट्र है॥38॥
 
‘Those bamboos (becoming a means) take the accomplished men to the other side of Shailoda and bring them back from there to this side. The place where only virtuous men live is Uttara Kurudashtra, situated on the banks of Shailoda.॥ 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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