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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 42: सुग्रीव का पश्चिम दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए सुषेण आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  4.42.56 
दृष्टायां तु नरेन्द्रस्य पत्न्याममिततेजस:।
कृतकृत्या भविष्याम: कृतस्य प्रतिकर्मणा॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
हम बहुत आभारी होंगे जब हमें महान और तेजस्वी राजा श्री राम की पत्नी के बारे में पता चलेगा; क्योंकि यही एकमात्र तरीका है जिससे हम उनके द्वारा किए गए उपकार का बदला चुका सकते हैं।'
 
We will be very grateful when we find out about the wife of the great and radiant King Shri Ram; because this is the only way we can repay the favour he has done.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)