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ramayan 4.42.54: तुम सब लोग उनकी आज्ञा में रहो और उनकी सब बातें ध्यानपूर्वक सुनो; क्योंकि ये महाबली और पराक्रमी सुषेणजी मेरे ससुर और गुरु हैं (और इसलिए वे तुम लोगों के लिए गुरु के समान ही आदरणीय हैं)॥ 54॥   |   ramayan सर्ग 4.42: सुग्रीव का पश्चिम दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए सुषेण आदि वानरों को वहाँ भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 42: सुग्रीव का पश्चिम दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए सुषेण आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  4.42.54 
श्रोतव्यं सर्वमेतस्य भवद्भिर्दिष्टकारिभि:।
गुरुरेष महाबाहु: श्वशुरो मे महाबल:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
तुम सब लोग उनकी आज्ञा में रहो और उनकी सब बातें ध्यानपूर्वक सुनो; क्योंकि ये महाबली और पराक्रमी सुषेणजी मेरे ससुर और गुरु हैं (और इसलिए वे तुम लोगों के लिए गुरु के समान ही आदरणीय हैं)॥ 54॥
 
All of you must remain under his command and listen attentively to all his words; because this mighty and powerful Sushenji is my father-in-law and my teacher (and therefore he is as respectable to you as a teacher).॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)