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ramayan 4.42.49: ‘सूर्य के समान तेजस्वी महर्षि मेरुवर्णि के चरणों में सिर झुकाकर प्रणाम करके तुम उनसे मिथिलेशकुमारी के विषय में पूछो॥ 49॥   |   ramayan सर्ग 4.42: सुग्रीव का पश्चिम दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए सुषेण आदि वानरों को वहाँ भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.42.49 
प्रष्टव्यो मेरुसावर्णिर्महर्षि: सूर्यसंनिभ:।
प्रणम्य शिरसा भूमौ प्रवृत्तिं मैथिलीं प्रति॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
‘सूर्य के समान तेजस्वी महर्षि मेरुवर्णि के चरणों में सिर झुकाकर प्रणाम करके तुम उनसे मिथिलेशकुमारी के विषय में पूछो॥ 49॥
 
‘After bowing your heads and paying your respects to the feet of Maharishi Merusavarni who is as radiant as the Sun, you should ask him about Mithilesh Kumari.॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)