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ramayan 4.42.43: 'मेरु से क्षितिज दस हजार योजन दूर है, किन्तु सूर्य वहाँ आधे मुहूर्त में पहुँच जाता है।   |   ramayan सर्ग 4.42: सुग्रीव का पश्चिम दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए सुषेण आदि वानरों को वहाँ भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.42.43 
योजनानां सहस्राणि दश तानि दिवाकर:।
मुहूर्तार्धेन तं शीघ्रमभियाति शिलोच्चयम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
'मेरु से क्षितिज दस हजार योजन दूर है, किन्तु सूर्य वहाँ आधे मुहूर्त में पहुँच जाता है।
 
‘The horizon is ten thousand yojanas away from Meru, but the Sun reaches there in half a muhurta.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)