श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 42: सुग्रीव का पश्चिम दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए सुषेण आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 36-37
 
 
श्लोक  4.42.36-37 
तमतिक्रम्य शैलेन्द्रं महेन्द्रपरिपालितम्।
षष्टिं गिरिसहस्राणि काञ्चनानि गमिष्यथ॥ ३६॥
तरुणादित्यवर्णानि भ्राजमानानि सर्वत:।
जातरूपमयैर्वृक्षै: शोभितानि सुपुष्पितै:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जब तुम देवताओं के राजा इन्द्र द्वारा सुरक्षित गिरिराज मेघ को पार करके आगे बढ़ोगे, तो तुम्हें साठ हजार सुवर्णमय पर्वत मिलेंगे, जो सब ओर से सूर्य के समान तेज से चमक रहे हैं और सुन्दर पुष्पों से युक्त सुवर्णमय वृक्षों से सुशोभित हैं ॥37॥
 
When you cross the Giriraj Megh, protected by the king of gods Indra, and move ahead, you will find sixty thousand golden mountains, which are glowing with the radiance like the sun from all sides and are adorned with golden trees filled with beautiful flowers. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)