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ramayan 4.42.33: जिसका भीतरी भाग सोने का बना हुआ प्रतीत होता है, उस वराह पर्वत को पार करने के बाद एक ऐसा पर्वत मिलेगा जिसका सम्पूर्ण शरीर सोने का बना है और जिस पर दस हजार झरने हैं॥ 33॥   |   ramayan सर्ग 4.42: सुग्रीव का पश्चिम दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए सुषेण आदि वानरों को वहाँ भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 42: सुग्रीव का पश्चिम दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए सुषेण आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  4.42.33 
तमतिक्रम्य शैलेन्द्रं काञ्चनान्तरदर्शनम्।
पर्वत: सर्वसौवर्णो धाराप्रस्रवणायुत:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जिसका भीतरी भाग सोने का बना हुआ प्रतीत होता है, उस वराह पर्वत को पार करने के बाद एक ऐसा पर्वत मिलेगा जिसका सम्पूर्ण शरीर सोने का बना है और जिस पर दस हजार झरने हैं॥ 33॥
 
After crossing the Varaaha mountain whose interior appears to be made of gold, one will find a mountain whose entire body is made of gold and on which there are ten thousand waterfalls.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)