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ramayan 4.42.31: वहाँ प्राग्ज्योतिष नामक एक सुवर्णमय नगर है, जिसमें नरक नामक राक्षस निवास करता है ॥31॥   |   ramayan सर्ग 4.42: सुग्रीव का पश्चिम दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए सुषेण आदि वानरों को वहाँ भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.42.31 
तत्र प्राग्ज्योतिषं नाम जातरूपमयं पुरम्।
यस्मिन् वसति दुष्टात्मा नरको नाम दानव:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
वहाँ प्राग्ज्योतिष नामक एक सुवर्णमय नगर है, जिसमें नरक नामक राक्षस निवास करता है ॥31॥
 
There is a golden city called Pragjyotish, in which a demon called hell resides. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)