‘चौबीस करोड़ गंधर्व, जो इच्छानुसार रूप धारण कर सकते हैं, भयंकर, अग्नि के समान तेजस्वी और वेगवान हैं, पारियात्र पर्वत के शिखर पर निवास करते हैं। वे सब अग्नि की ज्वालाओं के समान चमकते हुए सब दिशाओं से उस पर्वत पर एकत्रित हुए हैं।॥ 20-21॥
‘Twenty-four crore Gandharvas, who can assume any form at will, are fearsome, radiant like fire and swift, reside on the peak of Pariyatra mountain. All of them are shining like the flames of fire and have gathered on that mountain from all directions.॥ 20-21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥