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श्लोक 4.41.49  |
अमितबलपराक्रमा भवन्तो
विपुलगुणेषु कुलेषु च प्रसूता:।
मनुजपतिसुतां यथा लभध्वं
तदधिगुणं पुरुषार्थमारभध्वम्॥ ४९॥ |
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| अनुवाद |
| तुम सबमें अपार बल और पराक्रम है। तुम सब बड़े ही पुण्य कुल में उत्पन्न हुए हो। जिस प्रकार भी राजकुमारी सीता को पा सको, उसी प्रकार उच्चस्तरीय प्रयत्न करना आरम्भ करो।॥49॥ |
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| ‘You all have immense strength and valour. You have been born in very virtuous families. In whatever way you can find Princess Sita, start making high level efforts accordingly.’॥ 49॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे एकचत्वारिंश: सर्ग: ॥ ४ १॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें इकतालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ४ १॥ |
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