श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 41: सुग्रीव का दक्षिण दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए वहाँ प्रमुख वानर वीरों को भेजना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  4.41.45 
एतावदेव युष्माभिर्वीरा वानरपुंगवा:।
शक्यं विचेतुं गन्तुं वा नातो गतिमतां गति:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
'वीर वानर योद्धाओं! तुम्हें दक्षिण दिशा में केवल इतनी ही दूरी तक जाकर खोज करनी है। इससे आगे जाना असंभव है क्योंकि गतिशील प्राणी उस दिशा में गति नहीं कर सकते।'
 
‘Brave monkey warriors! You have to go and search only up to this distance in the southern direction. It is impossible to go beyond that because moving creatures cannot move in that direction.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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