| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड » सर्ग 41: सुग्रीव का दक्षिण दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए वहाँ प्रमुख वानर वीरों को भेजना » श्लोक 43-44h |
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| | | | श्लोक 4.41.43-44h  | शैलूषो ग्रामणी: शिक्ष: शुको बभ्रुस्तथैव च।
रविसोमाग्निवपुषां निवास: पुण्यकर्मणाम्॥ ४३॥
अन्ते पृथिव्या दुर्धर्षास्तत: स्वर्गजित: स्थिता:। | | | | | | अनुवाद | | उनके नाम हैं - शैलूष, ग्रामणी, शिक्षा (शिग्रु), शुक और बभ्रु। उस ऋषभ के आगे पृथ्वी की अंतिम सीमा पर सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि के समान तेजस्वी पुण्यात्मा पुरुषों का निवास है। अतः वहाँ केवल स्वर्ग को जीतने वाले (स्वर्ग के अधिकारी) पुरुष ही निवास करते हैं। 43 1/2॥ | | | | Their names are - Shailush, Gramani, Shiksha (Shigru), Shuka and Babhru. Beyond that Rishabh, at the last boundary of the earth, is the abode of virtuous men as bright as the sun, the moon and fire. Therefore, only the men who have conquered heaven (possessor of heaven) reside there. 43 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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