श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 41: सुग्रीव का दक्षिण दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए वहाँ प्रमुख वानर वीरों को भेजना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  4.41.38 
सर्पराजो महाघोरो यस्यां वसति वासुकि:।
निर्याय मार्गितव्या च सा च भोगवती पुरी॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
‘उस भोगवती पुरी में महान् नागराज वासुकि निवास करते हैं (वे योगबल से अनेक रूप धारण करके दोनों भोगवती पुरियों में एक साथ रह सकते हैं) तुम विशेष रूप से उस भोगवती पुरी में प्रवेश करो और वहाँ सीता की खोज करो॥38॥
 
‘The great serpent king Vasuki resides in that Bhogwati Puri (he can take many forms and live together in both the Bhogwati Puris with the power of yoga). You should especially enter that Bhogwati Puri and search for Sita there. 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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